क्या बात है जो कि आज उन्होने इतनी दूरी बना ली है ? कोई ना कोई तो बात होगी ही ! किसी ने कहा भी है कि ऐसे ही कोई बेवफ़ा नही होता कोई ना कोई मजबूरी रही होगी. . . . . . . .लेकिन ये बात हमारी समझ मे क्यो नही आ रही कि किसी की मजबूरी भी हो सकती है १ क्या हमारी कभी कोई मजबूरी नही थी क्या ? खैर किसी से क्या शिकवा ?अगर शिकायत भी करे तो किस को. . . . .उन को. . . . .. जिनहे खुद हमारे से ही शिकायत है......................
कोई ये तो बता दे कि हमे खुली हवा मे श्वास लेने की मनाही है क्या ? क्या हमे कोई हक नही है कि हम भी अपनी बात रख सके ? क्या हमे कोई हक नही है कि हम किसी को उसका सही गलत बता सके ?
लेकिन क्यो नौबत आती है कि हम किसी को सही गलत बताये ?
क्या जरुरत है किसी को कोई बात कहने.................
Saturday, February 6, 2010
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